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रविवार, 27 जनवरी 2019

वंदे भारत एक्सप्रेस होगा ट्रेन 18 का नामः पीयूष गोयल

नई दिल्ली
पूरी तरह से स्वदेश निर्मित ट्रेन 18 का नाम वंदे भारत एक्सप्रेस होगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी दी है। सेफ्टी क्लियरेंस, ट्रायल्स और टेस्ट्स पास कर लेने के बाद देश में निर्मित सेमी-हाईस्पीड ट्रेन 18 यात्रियों की सेवा के लिए तैयार है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन 18 के टिकट शताब्दी के मुकाबले 40 से 50 प्रतिशत तक महंगे होंगे।

धिकारियों ने बताया कि उन्होंने ट्रेन 18 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाएं, इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से संपर्क किया गया है। पहली ट्रेन 18 नई दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र है।

उन्होंने कहा, इंजनलेस ट्रेन 18 का ट्रैक्शन इक्विपमेंट बोगियों के नीचे लगे हैं। इसे सरकार के इलेक्ट्रिक इंस्पेक्टर (EIG) ने गुरुवार को हरी झंडी दे दी। 'इसलिए, हमने नई दिल्ली-वाराणसी रूट पर ट्रेन 18 के उद्घाटन के समय की मांग के लिए पीएमओ से संपर्क किया है।'

इसी महीने रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि ट्रेन 18 नई दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी। इस दौरान कानपुर और प्रयागराज में रुकते हुए 8 घंटों में कुल 755 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। यह इस रूट पर सबसे तेज चलने वाली ट्रेन होगी। अभी सबसे तेज ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच की दूरी 11 घंटे 30 मिनट में तय करती है। ट्रेन-18 में अलग से कोई इंजन नहीं है। इस रेलगाड़ी के एक सेट में 16 डिब्बे लगे हैं। इसे पहले दिल्ली-वाराणसी के बीच चलेगी। इसकी अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा है।

रेलमंत्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इसे हरी झंडी दिखाएंगे। ट्रेन-18 को चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी) ने 18 महीने में तैयार किया है। इस पर 97 करोड़ की लागत आई है। इसे पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस रेलगाड़ी का उत्तराधिकारी माना जा रहा है, जो 30 साल पहले विकसित की गई थी। यह देश की पहली इंजन-रहित रेलगाड़ी होगी।

गोयल ने कहा, ‘ट्रेन-18 का नाम वंदे भारत एक्सप्रेस होगा। इस रेलगाड़ी को भारतीय इंजिनियरों ने मात्र 18 महीनों में पूरी तरह भारत में बनाया है। यह दिल्ली से वाराणसी के बीच चलेगी। यह एक उदाहरण है कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत विश्वस्तरीय रेलगाड़ियों का निर्माण किया जा सकता है।’

पूरी तरह से वातानुकूलित इस रेलगाड़ी में दो एग्जिक्युटिव कुर्सीयान होंगे। दिल्ली और वाराणसी के मार्ग पर यह बीच में कानपुर और इलाहाबाद रुकेगी। गोयल ने कहा, ‘यह पूरी तरह से भारत में बनी रेलगाड़ी है। आम लोगों ने इसके कई नाम सुझाए लेकिन हमने इसका नाम ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ रखने का निर्णय किया है। यह गणतंत्र दिवस के मौके पर लोगों के लिए एक तोहफा है। हम प्रधानमंत्री से इसे जल्द हरी झंडी दिखाने का अनुरोध करेंगे।’
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